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औषधि अधिनियम के तहत एफआईआर का अधिकार पुलिस के पास नहीं

HEALTH

source: medicarenews.in

10/2/20251 min read

नई दिल्ली। दवाओं से संबंधित प्रावधानों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय में दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि औषधि अधिनियम (Drugs and Cosmetics Act) के तहत एफआईआर दर्ज करने का अधिकार पुलिस के पास नहीं है। न्यायालय ने कहा कि इस अधिनियम के अंतर्गत आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का अधिकार केवल सक्षम प्राधिकृत अधिकारी को है, न कि पुलिस को।

न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ यह आदेश उस समय दे रही थी, जब एक याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जिसमें मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (एमएम) द्वारा आवेदन स्वीकार कर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया था। अदालत ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पुलिस को औषधियों की गुणवत्ता अथवा उल्लंघन से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज करने का कोई अधिकार नहीं है। इस कारण से औषधि अपराधों के संबंध में दर्ज एफआईआर रद्द की जाती है।

पीठ ने यह भी कहा कि न्यायालय, यदि उचित कारण हो, तो विलंब की स्थिति में भी अपराध का संज्ञान लेने का अधिकार रखता है। हालांकि इस मामले में 2019 में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ी और इसका कोई ठोस कारण नहीं दिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि में प्रतिवादी कंपनी ने याचिकाकर्ता-एलएलपी पर आरोप लगाया था कि उसने खराब दवाइयाँ उपलब्ध कराई थीं। शिकायत के अनुसार, दवाइयों की शीशियों में कांच के टुकड़े और बाहरी कण पाए गए, जिनकी जानकारी डिलीवरी के तुरंत बाद सामने आई। शिकायत दर्ज होने के बावजूद प्रतिवादी-राज्य की ओर से कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए।

चिकित्सा पद्धति पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जहां केवल औषधियों की गुणवत्ता और विनियमन से जुड़े मामलों में पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती, वहीं अवैध रूप से शल्य-चिकित्सा (सर्जरी) करने या विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों (crosspathy) का अभ्यास करने वाले प्रैक्टिशनर्स के खिलाफ पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज कर सकती है। यह कार्यवाही उन संबंधित अधिनियमों और दंडात्मक प्रावधानों के तहत की जाएगी, जो चिकित्सा शिक्षा और अभ्यास पर लागू होते हैं। इसका उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा पद्धति की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

इस प्रकार, उच्च न्यायालय ने यह रेखांकित किया है कि औषधियों से संबंधित अपराधों में कार्रवाई का अधिकार सक्षम प्राधिकारी तक सीमित है, परंतु अवैध चिकित्सा अभ्यास और शल्यक्रियाओं पर पुलिस सीधे कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

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